An Analytical Study of the Financial Performance of Cooperative Agriculture and Rural Development Banks in Uttar Pradesh
उत्तर प्रदेश में सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंकों के वित्तीय निष्पादन का विश्लेषणात्मक अध्ययन (https://doi.org/10.5281/zenodo.21790001)
##semicolon##
सहकारी बैंक, उत्तर प्रदेश, एनपीए, कृषि ऋण, एससीएआरडीबी, वसूली दर।सार
प्रस्तुत शोध पत्र में उत्तर प्रदेश के राज्य सहयोगी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (एससीएआरडीबी) के वित्तीय स्वास्थ्य और परिचालन दक्षता का अध्ययन किया गया है। शोध पत्र मुख्य रूप से सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंकों के वित्तीय संकेतकों जैसे-एनपीए अनुपात, वसूली दर, लाभप्रदता और बाजार हिस्सेदारी का मुख्य रूप से अध्ययन करता है। इस अध्ययन में वर्ष 2010 से 2025 तक के द्वितीयक आंकड़ों का प्रयोग किया गया है, जिनका संकलन इंडियास्टैट से किया किया है जो मुख्य रूप से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), नाबार्ड और नाफ्सकॉब के आँकड़ो पर आधारित है। आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि, उत्तर प्रदेश के एससीएआरडीबी में वर्ष 2024 में एनपीए का स्तर 76.2 प्रतिशत है, जो चिंताजनक स्थिति का परिचायक है, जबकि इसी दौरान वसूली दर मात्र 27.7 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो कि राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। इसके अतिरिक्त, कृषि ऋण प्रवाह में सहकारी बैंकों की राष्ट्रीय हिस्सेदारी जो 2012 में 18 प्रतिशत थी वह कम होकर 2025 में 9 प्रतिशत के स्तर पर आ गई है, जो वाणिज्यिक बैंकों के बढ़ते वर्चस्व और सहकारी संस्थाओं के श्संरचनात्मक हाशिएश् की स्थित को दर्शाती है। शोध से प्राप्त निष्कर्ष में एक विरोधाभास भी देखने को मिलता, जहाँ उत्तर प्रदेश का अल्पकालिक सहकारी ढांचा (राज्य सहकारी बैंकय एसटीसीबी एवं जिला केंद्रीय सहकारी बैंकय डीसीसीबी) लाभप्रदता और निम्न एनपीए के साथ सुदृढ़ हो रहा है, वहीं दीर्घकालिक ऋण संरचना (एससीएआरडीबी) अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर, यह शोध पत्र सुझाव देता है कि दीर्घकालिक सहकारी बैंकों को पुनर्जीवित करने के लिए कठोर वसूली तंत्र, व्यावसायिक प्रबंधन और तकनीकी एकीकरण की आवश्यकता है। बिना इन सुधारों के, ग्रामीण उत्तर प्रदेश में पूंजी निर्माण और कृषि विविधीकरण सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती होगी।
