An Overview of Contract Farming in India.

भारत में अनुबंध खेती का एक अवलोकन (https://doi.org/10.5281/zenodo.21316668)

लेखक

  • Dr. Gajendra Singh 'Madhusudan' ##default.groups.name.author##

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अनुबंध खेती, फसल-पूर्व समझौता, आपूर्ति श्रृंखला, जोखिम, मॉडल।

सार

भारत में अनुबंध खेती, किसानों और कंपनियों के बीच एक समझौता है जहाँ किसान पूर्व-निर्धारित शर्तों के तहत एकविशिष्ट फसल उगाते हैं, जिसमें गुणवत्ता मानक, कीमत और आपूर्ति शामिल होती है। इसके तहत कंपनियां किसानोंको इनपुट (बीज, उर्वरक, तकनीकी सहायता) प्रदान करती हैं और बदले में, बाजार की अनिश्चितता के बिना, एकनिश्चित मूल्य पर उपज खरीदती हैं। यह व्यवस्था किसानों को एक गारंटीकृत बाजार प्रदान करती है और कृषि मेंव्यावसायिकता लाती है। अनुबंध खेती से किसानों को उचित मूल्य प्राप्त करने, जोखिम कम करने और उत्पादकताबढ़ाने में मदद मिलती है। चुनौतियों के बावजूद, बेहतर नीतियों और किसानों की बढ़ती जागरूकता के साथ, भारत मेंअनुबंध खेती का भविष्य आशाजनक दिखाई देता है। किसानों को अब बाज़ार संपर्क और विशेषज्ञ सलाहकार सहायतातक बेहतर पहुँच प्राप्त है, जिससे अनुबंध खेती एक अधिक व्यवहार्य और लाभदायक विकल्प बन गई है। हालांकि,अनुबंध खेती की चिंताओं में छोटे किसानों का शोषण, निर्भरता का जोखिम, कानूनी सुरक्षा का अभाव और असमानसमझौते शामिल हैं, जो अक्सर किसानों को असुरक्षित बना देते हैं और उनकी सौदेबाजी की शक्ति को सीमित कर देतेहैं। अनुबंध खेती की ऐसी चिंताओं का समाधान आवश्यक है। प्रस्तुत शोध पत्र में भारत में अनुबंध खेती की विकासप्रक्रिया, प्रकार, लाभ, चुनौतियां और विधिक प्रक्रिया का अवलोकन करने का प्रयास किया गया है।

##submission.authorBiography##

  • Dr. Gajendra Singh 'Madhusudan'

    Assistant Professor (Economics), Goswami Tulsidas Government Post Graduate College, Karwi, Chitrakoot, Uttar Pradesh.

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प्रकाशित

2025-09-30