A Study of India-China Bilateral Trade Relations.

भारत-चीन द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों का एक अध्ययन (https://doi.org/10.5281/zenodo.21316837)

लेखक

  • Dr. Mukesh Kumar ##default.groups.name.author##
  • Pawan Kumar Singh ##default.groups.name.author##

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व्यापार घाटा, आर्थिक संबंध, भारत-चीन व्यापार संरचनाए द्विपक्षीय संबंध।

सार

भारत और चीन दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से हैं, जिनके बीच परस्पर क्रिया और संबंधों का लंबा इतिहास रहा है। ये दुनियां की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाएँ हैं। उदारीकरण कें बाद दोनों ने तेजी से प्रगति की है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और अर्थव्यवस्था की प्रमुख घटनाओं में से एक हाल ही में द्विपक्षीय व्यापार में हुई तेज वृद्धि है। भारत, चीन के शीर्ष दस व्यापारिक साझेदारों में से एक के रूप में उभरा है, जबकि चीन, भारत के शीर्ष तीन व्यापारिक साझेदारों में से एक के रूप में उभरा है। अर्थव्यवस्थाओं के बड़े आकार एवं निर्यातों की संरचना के साथ-साथ उच्च विकास दर और दोनों पक्षों की राजनीतिक इच्छाशक्ति के कारण, द्विपक्षीय व्यापार बढ़ेगा, वैश्विक व्यापार एवं अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा। यद्यपि व्यापार की मात्रा में तेजी से वृद्धि हुई है, लेकिन इसने भारत को किसी भी देश के साथ अब तक के सबसे बड़े एकल व्यापार घाटे में भी धकेल दिया है। हमारी व्यापार घाटे की चिंताएँ दोतरफा हैं। एक तो घाटे का वास्तविक आकार और दूसरायह असंतुलन साल-दर-साल लगातार बढ़ता जा रहा है वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी विस्तृत व्यापार आंकड़ों के अनुसार, भारत ने 2024-25 में चीन को 14.25 अरब डॉलर मूल्य का माल निर्यात किया, जो पिछले वित्त वर्ष (2023-24) के 16.66 अरब डॉलर मूल्य के निर्यात से 14.4 प्रतिशत कम है। जबकि 2024-25 में, भारत ने 113.45 अरब डॉलर मूल्य का चीनी माल आयात किया, जो पिछले वित्त वर्ष में आयातित 101.73 अरब डॉलर मूल्य के आयात से 11.5 प्रतिशत अधिक है। आंकड़ों से पता चलता है कि चीन से भारत के आयात में दो अंकों की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई, जबकि चीन को भारतीय निर्यात में कमी आई, जिससे 99.2 अरब डॉलर का भारी व्यापार घाटा हुआ। इससे कुल द्विपक्षीय व्यापार 138.48 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया, जिससे चीन दो साल के अंतराल के बाद भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार के रूप में अपनी स्थिति पुनः प्राप्त कर सकेगा। यह शोध पत्र भारत और चीन के व्यापारिक संबंधों पर केंद्रित है। जिसमें भारत और चीन के बीच विकसित हो रहे व्यापार संबंधों तथा भविष्य की संभावनाओं का पता लगाने का प्रयास किया गया है।

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  • Dr. Mukesh Kumar

    Assistant Professor (Economics), Goswami Tulsidas Government Post Graduate College, Karwi, Chitrakoot, Uttar Pradesh.

  • Pawan Kumar Singh

    Assistant Professor, (Political Science), Savitribai Phule Government Post Graduate College, Chakiya, Chandauli.

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प्रकाशित

2025-09-30