An Overview of Dr. B.R. Ambedkar's Economic thoughts
डॉ. बी आर अंबेडकर के आर्थिक विचारों का अवलोकन (https://doi.org/10.5281/zenodo.21316974)
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अर्थव्यवस्था, कृषि, मुद्रा प्रणाली, भूमि सुधार, राष्ट्रीयकरण, कराधान, सामाजिक न्याय।सार
जब भी कोई देश राजनीतिक या आर्थिक चुनौतियों का सामना करता है, तो अक्सर बुद्धिजीवियों और विशेषज्ञों को अपने देश के इतिहास में समाधान खोजने की आवश्यकता पड़ती है। ऐतिहासिक घटनाएँ, उसके लोग और उनके विचार, जिन्होंने देश और उसके लोगों के भविष्य को आकार दिया है। वे देश की विरासत होने के साथ-साथ वर्तमान चुनौतियों के समाधान के लिए भी सार्थक सिद्ध होते हैं। डॉ. बी.आर. अंबेडकर भारत में अपने समय के एक ऐसे महान विचारक, नेता और बुद्धिजीवी हैं जिन्होंने न केवल लाखों अछूतों का जीवन बदला, बल्कि भारत का संविधान प्रारूपित कर उसे एक विशाल लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में आकारित करवाने में भी अप्रतिम योगदान दिया है। डॉ. अंबेडकर कानून, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, मीडिया, राजनीति और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में पारंगत थे। उनका मानना था कि ब्रिटिश भारत में विऔद्योगीकरण और विनगरीकरण प्रक्रिया ने भारत को बहुआयामी नुकसान पहुँचाया है। जबकि औद्योगीकरण भारत की गरीबी और बेरोजगारी की समस्याओं का एक शक्तिशाली एवं स्वाभाविक समाधान था। भारत में जाति व्यवस्था के खिलाफ उनका संघर्ष तो था ही, वे अपने समकालीन भारतीय अर्थव्यवस्था के विशेषज्ञ भी थे। वे 20वीं सदी के भारत के उत्कृष्ट बुद्धिजीवियों में से एक थे। भारत के आर्थिक विचारों में उनका उल्लेखनीय योगदान है। सार्वजनिक वित्त, मुद्रा प्रणाली और कृषि से संबंधित उनके विचार भारतीय अर्थव्यवस्था में मील के पत्थर हैं। इसी पृष्ठभूमि में प्रस्तुत शोध पत्र मुख्यतः डॉ. बी.आर. अंबेडकर के आर्थिक विचारों के अवलोकन पर केंद्रित है।