A Study of the impact of Government Schemes in Poverty Alleviation of Chitrakoot district

चित्रकूट जिले के गरीबी निवारण में सरकारी योजनाओं के प्रभाव का अध्ययन (https://doi.org/10.5281/zenodo.21790094)

लेखक

  • Dr. Gajendra Singh 'Madhusudan' ##default.groups.name.author##
  • Ram Lakhan ##default.groups.name.author##

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गरीबी निवारण, सामाजिक सुरक्षा, सशक्तिकरण, बुनियादी सुविधाएं, चित्रकूट।

सार

चित्रकूट बुंदेलखंड का एक ऐसा जिला है जो भौगोलिक चुनौतियों के कारण आर्थिक रूप से पिछड़ा रहा है। नीति आयोग द्वारा इसे आकांक्षी जिला घोषित किया गया, जिसके बाद से यहाँ गरीबी निवारण और बुनियादी विकास के लिए सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी आई है। गरीबी वह स्थिति है जिसमें किसी व्यक्ति या समुदाय के पास जीवन निर्वाह का एक बुनियादी स्तर बनाए रखने के लिए पर्याप्त धन या संसाधन नहीं होते हैं। गरीबी निवारण या गरीबी उन्मूलन आर्थिक और मानवीय उपायों का एक समूह है, जिसका उद्देश्य लोगों को स्थायी रूप से गरीबी से बाहर निकालना है। गरीबी निवारण एक जटिल समस्या है जिसके लिए समंवित और बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है। गरीबी उन्मूलन के लिये भारत ‘क्रमिक दृष्टिकोण’ अपना रहा है, जिसमें सामाजिक सुरक्षा, सशक्तिकरण, वित्तीय समावेशन और आजीविका संवर्धन को शामिल किया गया है। चूंकि वर्ष 2030 तक दुनिया से सभी लोगों के लिए चरम गरीबी का उन्मूलन सतत विकास लक्ष्यों का एक प्रमुख उद्देश्य है। इसलिए, प्रस्तुत शोध पत्र में यह जानने का प्रयास किया गया है कि क्या सरकारी योजनाओं ने चित्रकूट को ‘गरीबी के टैग’ से बाहर निकालने में कोई अहम भूमिका निभाई है और बुनियादी सुविधाओं के स्तर पर यहाँ की गरीबी को किस हद तक कम किया है। अतः प्रस्तुत शोध पत्र में चित्रकूट जिले के गरीबी निवारण में सरकारी योजनाओं के प्रभाव का अध्ययन किया गया है। 

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  • Dr. Gajendra Singh 'Madhusudan'

    Assistant Professor (Economics), Goswami Tulsidas Government Post Graduate College Karwi, Chitrakoot, Uttar Pradesh

  • Ram Lakhan

    Research Scholar (M.A. Economics), Goswami Tulsidas Government Post Graduate College, Karwi, Chitrakoot, Uttar Pradesh

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प्रकाशित

2026-06-30