A Constitutional Analysis of the Right to Life and Personal Liberty under the Indian Constitution

भारतीय संविधान के प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता के अधिकार का संवैधानिक विश्लेषण (https://doi.org/10.5281/zenodo.23016784)

Authors

  • Dr. Priyanka Patel Author

Keywords:

अनुच्छेद 21, जीवन, अधिकार, व्यक्तिगत स्वतंत्रता, मानवीय गरिमा, निजता।

Abstract

भारतीय संविधान में मौलिक अधिकारों की व्यवस्था नागरिक एवं राज्य के मध्य संबंधों को सुनिश्चित करता है। मौलिक अधिकार, राज्य के नकारात्मक दायित्वों की ओर इंगित करते हैं कि राज्य इन अधिकारों का अतिक्रमण नहीं कर सकता। इसका प्रमुख उद्देश्य व्यक्तियों को राज्य की स्वेच्छाचारिता से सुरक्षा प्रदान करना है। मौलिक अधिकारों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण अधिकार अनुच्छेद 21 में प्राण और दैहिक स्वतंत्रता के संरक्षण का अधिकार प्रदान किया गया है। संविधान में प्रदत्त अनुच्छेद 21 के प्रावधान अत्यंत संक्षिप्त है, परन्तु न्यायपालिका ने अपने निर्णयों से इसके विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। प्रस्तुत शोध-पत्र अनुच्छेद 21 के ऐतिहासिक और न्यायिक विकास का विश्लेषण करता है तथा यह समझने का प्रयास करता है कि भारतीय न्यायपालिका ने “जीवन” को मात्र जैविक अस्तित्व से आगे बढ़कर गरिमा और स्वतंत्रता से युक्त जीवन की अवधारणा में किस प्रकार परिवर्तित किया। यह शोध इस तथ्य का भी विश्लेषण करता है कि न्यायिक सक्रियता ने अनुच्छेद 21 के दायरे को विस्तृत करते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छ पर्यावरण, निजता, विधिक सहायता तथा गरिमापूर्ण जीवन जैसे अनेक अधिकारों को इसके अंतर्गत किस प्रकार मान्यता प्रदान की है। 

Author Biography

  • Dr. Priyanka Patel

    Assistant Professor (Political Science), Savitribai Phule Government Post Graduate College, Chakia, Chandauli

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Published

2026-09-30

How to Cite

A Constitutional Analysis of the Right to Life and Personal Liberty under the Indian Constitution: भारतीय संविधान के प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता के अधिकार का संवैधानिक विश्लेषण (https://doi.org/10.5281/zenodo.23016784). (2026). Bundelkhand Journal of Academic Research, 2(3). https://bjar.in/index.php/bjar/article/view/68