A Study of the Performance of the Cooperative Sector in Uttar Pradesh
उत्तर प्रदेश में सहकारी क्षेत्र के प्रदर्शन का अध्ययन (https://doi.org/10.5281/zenodo.21625748)
Keywords:
सहकारी प्रबंधन, सहकारी साख, पैक्स, ग्रामीण विकास, स्थानीय रोजगार।Abstract
देश की सर्वाधिक आबादी वाला उत्तर प्रदेश भारत की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर उभरा है, जिसका सकल राज्यीय घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) 30 लाख करोड़ रुपए से अधिक है और राष्ट्रीय जीडीपी में करीब 8 से 9 प्रतिशत का योगदान दे रहा है। यह पिछले कुछ वर्षों में ’एक्सप्रेसवे प्रदेश’ के रूप में विकसित हुआ है। बेहतर कानून-व्यवस्था और ’ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के कारण उत्तर प्रदेश निवेशकों का पसंदीदा गंतव्य बन गया है। फिलहाल यह 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है और इसकी प्राप्ति में सहकारी क्षेत्र की निर्णायक भूमिका हो सकती है, क्योंकि कृषि और एमएसएमई क्षेत्र प्रदेश में रोजगार के मुख्य चालक हैं। जबकि सहकारी क्षेत्र ने ग्रामीण विकास को बढ़ावा देकर, कृषि साख उपलब्ध कराकर और लघु उद्यमिता को सक्षम बनाकर उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला है। सहकारी समितियां न केवल ऋण, खाद, बीज और कृषि रसायनों के वितरण को सुगम बनाती हैं, बल्कि कृषि संबंधी आवश्यक सामग्री, विपणन माध्यम और भंडारण सुविधाएं उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा देने में सक्रिय रूप से शामिल हैं। ये तीन स्तरीय साख संरचना के माध्यम से सुलभ और सुगम अल्पकालिक से मध्यम अवधि का वित्त प्रदान कर वित्तीय समावेशन को प्रोत्साहित कर रही हैं। सहकारिता ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त स्थानीय रोजगार सृजित करती हैं। राज्य की अर्थव्यवस्था में सहकारिता की भूमिका के मद्देनजर और समावेशी विकास के अवसरों को बढ़ाने के लिए सहकारी क्षेत्र को पुनर्जीवित किया जाना आवश्यक है। इसलिए, प्रस्तुत शोध पत्र में उत्तर प्रदेश में सहकारी क्षेत्र के प्रदर्शन का अध्ययन करने का प्रयास किया गया है।