Guidelines For Authors
लेखकों द्वारा आलेख प्रेषण हेतु दिशानिर्देश
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प्रस्तुतीकरण दिशानिर्देश (Submission Guidelines) |
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बीजेएआर उन मौलिक योगदानों का स्वागत करता है जो कहीं अन्यत्र प्रस्तुत, प्रकाशित या प्रकाशन के लिए स्वीकृत नहीं हुए हैं। योगदानकर्ताओं को लेख प्रस्तुत करने वाले ईमेल में इसकी जानकारी देनी होगी। योगदानकर्ताओं से अनुरोध है कि वे बीजेएआर की स्टाइल शीट का पालन करें। सभी योगदानों के साथ निम्नलिखित अनुपालन होने चाहिए: आलेख सारांश 150-200 शब्द मुख्य शब्द 5 से 6 लेखक का नाम, ईमेल पता और पत्राचार के लिए संपर्क नंबर, प्रत्येक लेखक के लिए वर्तमान पदनाम और संबद्धता का विवरण देते हुए एक-पंक्ति का लेखक नोट। हम लेखक नोट में प्रदत्त ईमेल पता शामिल करते हैं। योगदानकर्ताओं को साहित्यिक चोरी और अत्यधिक आत्म-संदर्भों से सावधान किया जाता है। सामग्री की पुनरावृत्ति से बचने के लिए आंकड़े, ग्राफ़ और तालिकाओं का कम से कम उपयोग किया जाना चाहिए। सभी पूरक फ़ाइलें जैसे आंकड़े, तालिकाएँ, मानचित्र आदि, जहाँ तक संभव हो, MS Office (Word/Excel) या अन्य संपादन योग्य प्रारूपों में प्रदान की जानी चाहिए। बीजेएआर संपादकीय टीम किसी आलेख को किसी विशिष्ट अनुभाग में, जैसा उचित समझे, स्थान देने का अधिकार सुरक्षित रखती है। लेखों की प्राप्ति की सूचना ईमेल द्वारा एक संदर्भ संख्या के साथ दी जाती है जिसका उपयोग वेबसाइट पर आपके योगदान को ट्रैक करने के लिए किया जा सकता है। यदि योगदानकर्ताओं को योगदान के एक सप्ताह के भीतर पावती प्राप्त नहीं होती है, तो उनसे अनुरोध है कि वे हमें gayatripublication2025@gmail.com पर लिखें। हमें प्राप्त होने वाले लेखों की शीघ्र प्रक्रिया पूरी करने का हर संभव प्रयास किया जाता है। मासिक रूप से प्राप्त होने वाले लेखों की संख्या को देखते हुए, किसी लेख को प्रकाशन के लिए स्वीकार किया जाए या नहीं, इस पर अंतिम निर्णय लेने में दो महीने तक का समय लग सकता है। प्रकाशन के लिए स्वीकृत लेखों को स्वीकृति की तिथि से मुद्रित रूप में प्रकाशित होने में एक महीने तक का समय लग सकता है। |
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शोध समीक्षाएँ (शब्द: 2000-2500): बीजेएआर द्वारा पुस्तक और समीक्षाओं को भी प्रकाशन के लिए विचार किया जा सकता है, लेकिन ऐसे आलेखों की शब्द सीमा 2500 से अधिक नहीं होनी चाहिए। |
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अंतर्दृष्टि आलेख (शब्द: 4000-5000): इस खंड में शैक्षणिक परिघटनाओं के नवीन और केंद्रित विश्लेषण पर विचार किया जाएगा, लेकिन ऐसे आलेखों की शब्द सीमा 5000 से अधिक नहीं होनी चाहिए। |
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परिप्रेक्ष्य आलेख (शब्द: 4000-5000): इस खंड में मौजूदा विद्वत्ता और समकालीन घटनाओं पर अद्वितीय दृष्टिकोण प्रस्तुत करने वाले आलेखों को स्वीकार किया जाएगा, लेकिन ऐसे आलेखों की शब्द सीमा 5000 से अधिक नहीं होनी चाहिए। |
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विशेष आलेख (शब्द: 7000 तक): इस खंड के लिए शैक्षणिक, विज्ञान, मानविकी और सामाजिक विज्ञान के किसी भी क्षेत्र में मूल, अप्रकाशित शोध पत्र स्वीकार किए जाएँगे, लेकिन ऐसे आलेखों की शब्द सीमा 7000 से अधिक नहीं होनी चाहिए। सभी विशेष आलेखों की पीयर समीक्षा की जाती है। |
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शोध आलेख (शब्द: 6000-7000): इस खंड के लिए शैक्षणिक, विज्ञान, मानविकी और सामाजिक विज्ञान में प्रारंभिक शोध को कवर करने वाले मौलिक लेखों पर विचार किया जाएगा, लेकिन ऐसे आलेखों की शब्द सीमा 7000 से अधिक नहीं होनी चाहिए। सभी विशेष आलेखों की पीयर समीक्षा की जाती है। |
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कॉपीराइट 1. बीजेएआर में प्रकाशित सभी आलेखों का कॉपीराइट बीजेएआर या उस संगठन का होगा जहाँ लेखक कार्यरत है, जैसा कि लेखक की रोजगार शर्तों द्वारा निर्धारित किया जाता है। 2. बीजेएआर को लेखकों द्वारा अपने आलेखों को अन्य प्रकाशनों के लिए पुनः प्रकाशित या संशोधित करने पर कोई आपत्ति नहीं है। हालाँकि, पुनः प्रकाशित आलेखों में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाना चाहिए कि लेख का एक संस्करण सबसे पहले बीजेएआर में प्रकाशित हुआ था। इसमें मूल बीजेएआर आलेखों के URL के साथ प्रकाशन विवरण भी शामिल होना चाहिए। 3. लेखक/लेखकों की पूर्व अनुमति के बिना किसी भी प्रकाशित आलेखों या उसके किसी भाग का किसी भी रूप में पुनरुत्पादन नहीं किया जाना चाहिए। लेखक/लेखकों की स्वीकृति की एक सॉफ्ट कॉपी बीजेएआर को भेजी जानी चाहिए। |
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सामान्य निर्देश (General Instructions) |
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1. बीजेएआर में प्रकाशनार्थ प्रेषित किये जाने वाला शोध पत्र मौलिक एवं अप्रकाशित होना चाहिए। शोध पत्र ई-मेल द्वारा द्वारा प्रेषित करना चाहिए। |
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2. लेखक को शोध पत्र के साथ इस आशय का घोषणा पत्र अवश्य संलग्न करना होगा कि यूजीसी/एमएचआरडी के मानकानुरूप यह शोध पत्र उसका मौलिक, अप्रकाशित शोध पत्र है, एवं इसमें किसी भी प्रकार की साहित्यिक चोरी नहीं है। |
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3. यदि शोध पत्र में मुख्य शोधकर्ता के साथ अन्य नाम भी हैं, तो उन्हें भी मौलिकता और साहित्यक चोरी का प्रमाण पत्र देना होगा। शोध पत्र के साथ प्लैगरिज्म रिपोर्ट भी संलग्न की जानी चाहिए। |
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4. शोध पत्र प्राप्त होने के उपरांत संबंधित शोधार्थी के पास ई-मेल द्वारा शोध पत्र प्राप्ति की सूचना दी जाएगी। |
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5. शोध पत्र प्राप्त होने के उपरांत संपादक मण्डल द्वारा उसे संबंधित विषय के विशेषज्ञ (रीव्यूवर) के पास ई-मेल द्वारा भेजा जाएगा, जिसका विषय विशेषज्ञ द्वारा विधिवत् मूल्यांकन, परीक्षण और संशोधन किया जाएगा, तदुपरांत संपादक मण्डल के पास प्रकाशनार्थ प्रेषित किया जाएगा। |
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6. विषय विशेषज्ञ / संपादक मण्डल के पास शोध पत्र के प्रकाशन और संशोधन का पूर्ण अधिकार होगा। कोई भी शोध पत्र संपादक मण्डल / रीव्यू पैनल द्वारा पूर्णतः मूल्यांकन के उपरांत ही प्रकाशनार्थ स्वीकृति किया जायेगा। |
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7. पूर्णतः स्वीकृति के उपरांत ही शोधार्थी को संबंधित शोध आलेख का स्वीकृति संदेश निर्दिष्ट ई-मेल पर प्रेषित किया जायेगा। हालांकि, शोध पत्र के प्रकाशन, कापी राइट एवं अन्य सभी प्रकार के मामलों में प्रधान संपादक एवं संपादक का निर्णय अंतिम एवं मान्य होगा। |
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8. शोध पत्र में व्यक्त विचार, शोध बिंदु, संदर्भ हेतु पूर्णतः शोधार्थी की जिम्मेदारी होगी। किसी भी प्रकार से संपादक मण्डल का उसमें कोई सरोकार नहीं होगा। शोध-पत्र भेजने के बाद उसे प्रकाशित करने हेतु किसी भी तरह का दबाव स्वीकार्य नहीं होगा। |
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9. शोध पत्र को निम्नलिखित रूप में ई-मेल द्वारा प्रेषित करें: i. टंकण विधि A4 साईज में 1 इंच चारो तरफ छोड़कर ऑटो लीडिंग, पेज नंबरिंग सहित माइक्रोसॉफ्ट वर्ड के किसी भी वर्जन में टाइप करके भेजें एवं आवास का पता, संस्था का पता, दूरभाष एवं ईमेल आईडी अवश्य लिखें। ii. हिंदी माध्यम के शोध पत्र का सामान्य लेखन Kruti Dev 010 के फांट साइज 14 और मुख्य हेडिंग 16 जबकि शोध शीर्षक 24 में होना चाहिए। अंग्रेजी माध्यम के शोध पत्र का सामान्य लेखन Times New Roman के फांट साइज 12 और मुख्य हेडिंग 14 जबकि शोध शीर्षक 24 में होना चाहिए। iii. कीवर्डस, स्रोत एवं संदर्भ, शोध सारांश आदि का उल्लेख अवश्य होना चाहिए। iv. स्रोत एवं संदर्भ विधिवत निर्दिष्ट उद्धरण स्टाईल में रख कर उनका स्पष्ट उल्लेख करें। शोध पत्र में स्रोत एवं संदर्भ का स्पष्ट रूप से उल्लेख होना चाहिए। स्रोत एवं संदर्भों की स्पष्टता के अभाव में शोध पत्र स्वीकार्य नहीं होगा। |
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10. आप शोध पत्र प्रेषित करें : gayatripublication2025@gmail.com |
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शोध पत्रों के प्रकाशन एवं प्रेषण की आवृत्ति
बुंदेलखंड जर्नल ऑफ अकादमिक रिसर्च (बीजेएआर) त्रैमासिक शोध जर्नल है, जिसका प्रकाशन वर्ष में चार बार होता है। मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर के अंक प्रकाशन एवं आलेख संग्रहण का विवरण निम्न प्रकार है:
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बीजेएआर के अंक |
प्रेषण की तिथि |
प्रकाशन |
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जनवरी-मार्च |
10 मार्च तक |
अप्रैल के अंत में |
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अप्रैल-जून |
10 जून तक |
जुलाई के अंत में |
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जुलाई-सितंबर |
10 सितंबर तक |
अक्टूबर के अंत में |
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अक्टूबर-दिसंबर |
10 दिसंबर तक |
जनवरी के अंत में |
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शोध पत्र का शीर्षक
(Title of the Research Paper)
प्रथम लेखक^1, द्वितीय लेखक^2, और तृतीय लेखक^3
^1 पहले संस्थान का नाम (Name of First Institution) Email Id
^2 दूसरे संस्थान का नाम (Name of Second Institution) Email Id
^3 तीसरे संस्थान का नाम (Name of Third Institution) Email Id
सारांश (Abstract)
यहां 150-200 शब्दों में अपने शोध का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
मुख्य शब्द (Keywords): 5 से 6 मुख्य शब्द दिए जाने चाहिए जो शोध विषय की केंद्रीय अवधारणाओं को दर्शाते हों। ये पहचान, खोज और सूचकांकन योग्य होने चाहिए ताकि पाठक और शोधार्थी प्रासंगिक शोध को खोजने और अनुक्रमित (index) करने के लिए इनका उपयोग कर सकें। मुख्य शब्द के रूप में संज्ञा शब्द होने चाहिए, उपपद और क्रिया शब्द प्रयोग नहीं होने चाहिए।
1. परिचय एवं पृष्ठभूमि (Introduction and Background)
1.1. उप-शीर्षक (Subheading)
1.1.1. तृतीय स्तर उपशीर्षक (यदि हो तो )
1.1.2.
v यहां शीर्षक एवं विषय से संबंधित आवश्यक आधारभूत ज्ञान का परिचय दें।
v विषय का परिचय और इसका महत्व बताएं।
v समीक्षा के उद्देश्यों का उल्लेख करें।
v पृष्ठभूमि जानकारी और संदर्भ प्रदान करें।
2. सामग्री एवं विधि (Materials and Methods)
यहां आंकड़ों का विश्लेषण और निर्वचन करना है।
(Here is to analyse and interpret the data)
2.1. उप-शीर्षक (Subheading)
2.1.1. तृतीय स्तर उपशीर्षक (यदि हो तो)
v यहां सामग्री और विधि का विवरण दें।
v शोध की सम्पूर्ण क्रियाविधि का वर्णन करें ।
v ध्यान रहे यह लेखन इस प्रकार किया जाए कि कोई भी शोधकर्ता इस विधि को पढ़ कर सरलता पूर्वक इस शोध-क्रियाविधि को स्वयं भी दोहरा सके।
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सारणी-1: सारणी का शीर्षक या नाम (Table 1: Title or Name of Table) |
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उपशीर्षक (Subtitle) |
उपशीर्षक (Subtitle) |
उपशीर्षक (Subtitle) |
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तथ्य या आंकड़े (Data or Figures) |
तथ्य या आंकड़े (Data or Figures) |
तथ्य या आंकड़े (Data or Figures) |
3. परिणाम एवं प्राप्तियां (Results and Findings)
3.1. उप-शीर्षक (Subheading)
3.1.1. तृतीय स्तर उपशीर्षक (यदि हो तो)
v शोध-पत्र के इस भाग को प्रयास पूर्वक एक तार्किक ढंग से प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
v तथ्यों, अभिकथनों एवं कारणों का एक सरल प्रवाह होना चाहिए और इन सभी के लिए उचित संदर्भ भी प्रदान किए जाने चाहिए।
v शोध के उद्देश्य के अनुसार आंकड़ों के विश्लेषण और निर्वचन से क्या प्राप्त हुआ है, इसका संक्षेप में प्रस्तुतीकरण किया जाना चाहिए।
4. चर्चा एवं बहस (Discussion and Debate)
4.1. उप-शीर्षक (Subheading)
4.1.1. तृतीय स्तर उपशीर्षक (यदि हो तो)
v इस भाग में पिछले भाग में वर्णित परिणामों के बारे में गूढ विश्लेषण और विभिन्न दृष्टिकोणों से चर्चा की जानी चाहिए।
v परिणाम एवं प्राप्तियों के प्रभाव का विश्लेषण किया जाना चाहिए।
v शोध के उद्देश्य के अनुसार परिणाम एवं प्राप्तियों में निहित समस्याओं और चुनौतियों की चर्चा की जानी चाहिए।
v इस भाग में भी तथ्यों, अभिकथनों एवं कारणों का एक सरल प्रवाह होना चाहिए और इन सभी के लिए उचित संदर्भ भी प्रदान किए जाने चाहिए ।
v मुख्यतः साहित्य की समीक्षा में चिन्हित खोजों और वर्तमान लिखित साहित्य में छोड़े गए विषयों/रिक्तियों की पहचान को भी रेखांकित किया जा सकता है।
5. सुझाव एवं अनुशंसाएं (Suggestions and Recommendations)
5.1. उप-शीर्षक (Subheading)
5.1.1. तृतीय स्तर उपशीर्षक (यदि हो तो)
v इस भाग में पिछले भाग 4 और 5 में वर्णित परिणाम, प्राप्तियों एवं चर्चा के सापेक्ष आगे बढ़ने का उचित रास्ता (The way forward) क्या है, पर विभिन्न दृष्टिकोणों से चर्चा की जानी चाहिए।
v परिणाम एवं प्राप्तियों में निहित समस्याओं और चुनौतियों के औचित्यपूर्ण समाधान की चर्चा की जानी चाहिए।
v भावी शोध के विषयों और उप-विषयों का सुझाव दिया जा सकता है।
6. निष्कर्ष (Conclusion)
v आपके द्वारा प्रस्तुत शोधपत्र में किए गए प्रमुख खोजों और उनकी प्रासंगिकता का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
v विषय के महत्व एवं औचित्य को पुनः प्रस्तुत कीजिए।
v 4 से 6 वाक्यों में अपने प्रस्तुत शोध के परिणाम एवं निष्कर्षों की महत्ता को विषय के संदर्भ में बताइए।
7. स्रोत एवं संदर्भ (Sources and References)
v स्रोत एवं संदर्भ के उद्धरण का स्वरूप दिए गए प्रारूप में होना चाहिए।
v प्रस्तुत शोध पत्र में प्रयुक्त सभी मुख्य कार्यों की स्रोत एवं संदर्भ सूची प्रदान कीजिए।
v यह संदर्भ शोध-आलेख में उचित स्थानों पर पाठ्य के रूप (इन-टेक्स्ट) में भी लिखे जाने चाहिए।
v स्रोत एवं संदर्भ के उद्धरण का स्वरूप ग्रंथसूची, उद्धरण एवं संदर्भ शैली के उदाहरण में देखा जा सकता है:
परिशिष्ट (Appendices)
v परिशिष्ट A (Appendix A)
v परिशिष्ट B (Appendix B)
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ग्रंथसूची, उद्धरण एवं संदर्भ शैली के उदाहरण
(Bibliographic, Citation and Referencing Styles Examples)
स्रोत एवं संदर्भ के उद्धरण का स्वरूप निम्नलिखित होना चाहिए:
लेखक का नाम एवं उपनाम
(Name and Surname of the Author)
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लेखक |
नाम एवं उपनाम |
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एकल लेखक (डॉ. गजेन्द्र सिंह मधुसूदन) |
<उपनाम>, <नाम का आरंभिक अक्षर>. <मध्य नाम का अक्षर>. उदाहरण: मधुसूदन, जी. एस. |
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दो लेखक (डॉ. राजेश कुमार पाल एवं डॉ. अमित कुमार सिंह) |
<उपनाम1>, <प्रथम का आरंभिक नाम1>. <प्रथम का मध्य नाम1>. एवं <उपनाम2>, <द्वितीय का आरंभिक नाम2>. <द्वितीय का मध्य नाम2>. उदाहरण: पाल, आर. के. एवं सिंह, ए. के. |
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दो से अधिक लेखक (डॉ. अतुल कुमार कुशवाहा, डॉ. क्रांति भूषण मौर्य,….., एवं डॉ. अमित कुमार सिंह) |
<उपनाम1>, <प्रथम का आरंभिक नाम1>. <प्रथम का मध्य नाम1>., <उपनाम 2>, <द्वितीय का आरंभिक नाम2>. <द्वितीय का मध्य नाम2>., . . . , एवं <उपनाम n>, <n का आरंभिक नाम n>. < n का मध्य नाम n>. उदाहरण: कुशवाहा, ए. के., मौर्य, के. बी.,…, एवं सिंह, ए. के. |
खंड, अंक एवं पृष्ठ संख्या
(Volume, Issue and Page Numbers)
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दस्तावेज़ |
वॉल्यूम, अंक एवं पृष्ठ संख्या |
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एकल पृष्ठ
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वॉल्यूम <खंड संख्या>, पृष्ठ <पृष्ठ संख्या>। उदाहरण: वॉल्यूम-02, पृष्ठ -15। |
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कई पृष्ठ
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वॉल्यूम <खंड संख्या>, पृष्ठ <प्रारंभिक पृष्ठ संख्या> - <अंतिम पृष्ठ संख्या>। उदाहरण: वॉल्यूम-04, पृष्ठ 75-81। |
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जर्नल / पत्रिका या इसी तरह के पीरियडिकल्स
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<वॉल्यूम संख्या> (<इश्यू संख्या >): < प्रारंभिक पृष्ठ संख्या> – <अंतिम पृष्ठ संख्या>। उदाहरण: 12(6): 103–120। अथवा वॉल्यूम <खंड संख्या> अंक (<अंक संख्या>), <प्रारंभिक पृष्ठ संख्या> - <अंतिम पृष्ठ संख्या>। उदाहरण: वॉल्यूम-12, अंक-6, पृष्ठ 103–120। |
कुछ दस्तावेजों की ग्रंथसूची एवं उद्धरण शैलियाँ
(Bibliographic and citation styles of some documents)
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Document |
लेखक-वर्ष आधारित उद्धरण शैलियाँ |
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Book |
Format |
<लेखक> (<दिनांक>) । <पुस्तक का शीर्षक>। <प्रकाशक>, <पता>, <संस्करण संख्या> संस्करण, पृष्ठ <पृष्ठ संख्या>, आईएसबीएन : <आईएसबीएन संख्या>। |
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Example |
1. झिंगन, एम. एल. (2008)। अंतर्राष्ट्रीय अर्थशास्त्र। वृंदा पब्लिकेशन्स, मयूर विहार नई दिल्ली, पांचवां पुनर्मुद्रित संस्करण, 2008, पृष्ठ 1-670, आईएसबीएन: 8187125640। 2. पुरी, वी. के., मिश्र, एस. के. एवं गर्ग, भारत (2022)। भारतीय अर्थव्यवस्था। हिमालया पब्लिशिंग हाउस, गिरगांव मुम्बई, चौंतीसवाँ संस्करण, 2022, पृष्ठ 1-700, आईएसबीएन: 9789355964274। |
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Book chapter |
Format |
<लेखक> (<दिनांक>) । <अध्याय का शीर्षक> । <संपादक> में, संपादक (संपादकों), <पुस्तक का शीर्षक>, <प्रकाशन श्रृंखला> का खंड <खंड संख्या>, पृष्ठ <पृष्ठ संख्या>, <आईएसबीएन> । <प्रकाशक>, <पता> । |
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Example |
1. मधुसूदन, जी. एस एवं बघेल, एच. के. (2022)। डिजिटल अर्थव्यवस्था के फायदे और चुनौतियां: एक अवलोकन। गुप्ता, दिनेश कुमार (संपादक), ट्रांसफार्मिंग इंडिया: विजन एवं चैलेंजेज़, मार्च, 2022, पृष्ठ 69-90, आईएसबीएन: 9789391550592। एन. बी. पब्लिकेशन गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश। 2. मधुसूदन, जी.एस. एवं सिंह, एस. नाथ (2024)। भारत में फसल बीमा कार्यक्रम के कार्यान्वयन के अनुभवों का एक अध्ययन। सिंह, सी.बी., सिंह, एस.एन., लाल, अंकिता जे., फुरकान, मो., सोनी, शिखा (संपादक), सामाजिक विज्ञान एवं सतत भविष्य: 2023 और उसके बाद के लिए अंतर्दृष्टि एवं परिप्रेक्ष्य, पहला प्रकाशन, पृष्ठ 69-90, आईएसबीएन:9789363895065, कुणाल बुक्स पब्लिकेशन, दरियागंज, नई दिल्ली। |
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Seminar/Conference proceedings |
Format |
<लेखक> (<दिनांक>) । <लेख का शीर्षक> । <सम्मेलन का शीर्षक> में, वॉल्यूम <वॉल्यूम संख्या>, पृष्ठ <पृष्ठ संख्या>, <सम्मेलन का स्थान> । <प्रकाशक>, <पता>। |
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Example |
1. मधुसूदन, जी. एस (2023)। भारत में डिजिटल तकनीक से शिक्षा के बढ़ते अवसर और चुनौतियां। ऑनलाइन शिक्षण और उच्च शिक्षा में, वॉल्यूम-2, पृष्ठ 07–15, राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय बिंदकी, फतेहपुर, उत्तर प्रदेश। आइडियलिस्टिक जर्नल ऑफ़ एडवांस्ड रिसर्च इन प्रोग्रेसिव स्पेक्ट्रम्स (आईजेएआरपीएस)। आईजेएआरएमएस पब्लिकेशन, 221 एमआईजी फेज-2, कानपुर नगर, उत्तर प्रदेश। 2. मधुसूदन, जी. एस एवं सिंह, अमित के. (2025)। आत्मनिर्भर भारत के सपने के रूप में ग्रामीण पर्यटन की राष्ट्रीय रणनीति का मूल्यांकन। ग्रामीण पर्यटन: विकास, रोजगार और संभावनाएं में, विशेषांक वॉल्यूम: जनवरी–मार्च 2025, पृष्ठ 247-254, गोस्वामी तुलसीदास राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कर्वी, चित्रकूट, उत्तर प्रदेश। त्रैमासिक पत्रिका शोध धारा। शैक्षिक एवं अनुसंधान संस्थान प्रकाशक, उरई (जालौन) उत्तर प्रदेश। |
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Dictionary and Thesaurus |
Format |
<लेखक> (<दिनांक>)। <दस्तावेज का शीर्षक>। <प्रकाशक>, <पता>, <संस्करण संख्या> संस्करण, वॉल्यूम <वॉल्यूम संख्या>, पृष्ठ <पृष्ठ संख्या>। |
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Example |
1. सीएएलडी (2009)। कैम्ब्रिज एडवांस्ड लर्नर्स डिक्शनरी (सीएएलडी)। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस इंडिया प्रा. लि., तीसरा संस्करण, पृष्ठ 101–102। 2. सहाय, आर. एन. एवं कुमार, एस. (2018)। ऑक्सफ़ोर्ड इंग्लिश-इंग्लिश-हिंदी डिक्शनरी। ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, दूसरा संस्करण, वॉल्यूम-1, पृष्ठ-73। |
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Encyclopaedia |
Format |
<लेखक> (<दिनांक >) । <टॉपिक का शीर्षक >। <संपादक> संपादक (कों) में, <एनसाइक्लोपीडिया का शीर्षक>, <संस्करण संख्या> संस्करण, वॉल्यूम <वॉल्यूम संख्या>, पृष्ठ <पृष्ठ संख्या>। <प्रकाशक>, <पता>। |
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Example |
1. लिंडग्रेन, एच. सी. (2001)। स्टीरियोटाइपिंग। द कोर्सिनी इनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ साइकोलॉजी एंड बिहेवियरल साइंस, वॉल्यूम-4 में पृष्ठ 617–618 । विली, न्यूयॉर्क। 2. पेटिंगिल, जूनियर, ओ. एस. (1980)। फाल्कन और फाल्कनरी। वर्ल्ड बुक इनसाइक्लोपीडिया में पृष्ठ 150–155। वर्ल्ड बुक, शिकागो। |
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Journal/ Magazine/ Newspaper |
Format |
<लेखक> (<दिनांक>) । <लेख का शीर्षक> । <पत्रिका का शीर्षक>, <वॉल्यूम संख्या> (<इश्यू नंबर>), <पृष्ठ संख्या>, आईएसएसएन: <आईएसएसएन नंबर>। डीओआई:< डीओआई > |
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Example |
1. मधुसूदन, गजेन्द्र सिंह (2023)। संक्रमणशील समाज की पीड़ा: सहजीवन। शोध धारा, अक्तूबर–दिसंबर, 2023, पृष्ठ 173-184, आईएसएसएन: 09753664। DOI:10.5281/zenodo.16640430 2. मधुसूदन, जी. एस. एवं सिंह, एस. एन. (2024)। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की प्रगति और प्रदर्शन का एक अध्ययन। इंटरनेशनल जर्नल ऑफ साइंटिफिक डेवलपमेंट एंड रिसर्च (आईजेएसडीआर), वॉल्यूम-9, अंक-11, नवंबर-2024, पृष्ठ 487- 497, आईएसएसएन: 24552631। DOI:10.5281/zenodo.16642460 |
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Technical report |
Format |
<लेखक> (<दिनांक>) । <लेख का शीर्षक>। तकनीकी रिपोर्ट <रिपोर्ट संख्या>, <विभाग>, <संस्थान>, <पता>। |
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Example |
1. नाबार्ड (2022)। तमिलनाडु के तिरुवल्लूर और चेंगलपट्टू जिलों में सतत खारे पानी की एक्वाकल्चर के लिए कोस्टल वाटरशेड बेस्ड सरफेस और सबसरफेस सैलिनिटी मैपिंग और मॉडलिंग। टेक्निकल रिपोर्ट एनआरएस-27, डिपार्टमेंट ऑफ़ इकोनॉमिक एनालिसिस एंड रिसर्च, नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट, मुंबई। 2. घोष, डी. एवं कोठारी, आर. (2012)। पॉपुलेशन ह्यूरिस्टिक्स फॉर द कॉरिडोर एलोकेशन प्रॉब्लम। टेक्निकल रिपोर्ट W.P. नंबर 2012-09-02, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, अहमदाबाद, भारत। |
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Thesis (Master) |
Format |
<लेखक> (<दिनांक>) । <थीसिस का शीर्षक> । मास्टर थीसिस, <विभाग>, <संस्थान>, <पता> । |
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Example |
1. कुमार, प्रतीक (2024) । किसानों के वित्तीय समावेशन में किसान क्रेडिट कार्ड के प्रभाव का एक अध्ययन: चित्रकूट जिले के विशेष सन्दर्भ में। मास्टर थीसिस, अर्थशास्त्र विभाग, गोस्वामी तुलसीदास राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कर्वी, चित्रकूट। 2. कुमार, रवि (2020)। इम्पैक्ट ऑफ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) इन रायपुर डिस्ट्रिक्ट ऑफ छत्तीसगढ़। एम.एससी. (एजी) थीसिस, एग्रीकल्चर इकनॉमिक्स डिपार्टमेंट, एग्रीकल्चर कॉलेज, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर (छत्तीसगढ़)। |
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Thesis (PhD) |
Format |
<लेखक> (<दिनांक>)। <थीसिस का शीर्षक>। पीएचडी थीसिस, <विभाग>, <संस्थान>, <पता> । |
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Example |
सिंह, गजेन्द्र (2025)। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का बुन्देलखण्ड क्षेत्र के किसानों पर प्रभाव बांदा जनपद के विशेष संदर्भ में एक अध्ययन। पीएचडी थीसिस, बैंकिंग, अर्थशास्त्र एवं वित्त विभाग, बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झांसी, उत्तर प्रदेश। |
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Website/ webpage |
Format |
<लेखक> (∗<दिनांक>) । <डॉक्यूमेंट का शीर्षक> । <यूआरएल> से <दिनांक> को लिया गया ∗अगर पब्लिकेशन की तारीख मौजूद नहीं है, तब ‘कोई तारीख नहीं’ लिखा जा सकता है। |
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Example |
1.राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (30 सितंबर 2025)। भारत में आकस्मिक मौतें एवं आत्महत्याएँ, 2023। 20 अक्टूबर 2025 को https://www.ncrb.gov.in/accidental-deaths-suicides-in-india-adsi.html से लिया गया 2. भारतीय रिज़र्व बैंक (30 जून, 2025)। फ़ाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट। 23 अक्टूबर, 2025 को https://www.rbi.org.in/hindi/Scripts/FSReports.aspx से लिया गया |
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पाठ में संदर्भ
(In-text reference)
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लेखक |
पाठ में संदर्भ |
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एकल लेखक (डॉ. गजेन्द्र सिंह मधुसूदन) |
<उपनाम>, < वर्ष > उदाहरण: (मधुसूदन, 2024) |
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दो लेखक (डॉ. राजेश कुमार पाल एवं डॉ. अमित कुमार सिंह) |
<उपनाम1> और <उपनाम2>, < वर्ष > उदाहरण: (पाल एवं सिंह, 2023) |
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दो से अधिक लेखक (डॉ. अतुल कुमार कुशवाहा, डॉ. क्रांति भूषण मौर्य,….., एवं डॉ. अमित कुमार सिंह) |
<उपनाम1> आदि, < वर्ष > उदाहरण: (कुशवाहा एवं अन्य, 2025) |
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