A Study of the Performance of Urban Cooperative Banks in India
भारत में शहरी सहकारी बैंकों के प्रदर्शन का अध्ययन (https://doi.org/10.5281/zenodo.21626243)
Keywords:
सहकारिता, यूसीबी, एनपीए, बैंकिंग, सहकारी संस्थाएं, जोखिम, शहरी बैंक।Abstract
शहरी सहकारी बैंक (यूसीबी) मुख्यतया प्राथमिक सहकारी बैंकिंग संस्थाओं के रूप में शहरी एवं अर्धशहरी क्षेत्रों में कार्यरत हैं। वर्ष 1996 तक उन्हें केवल गैर कृषि क्षेत्रों में ऋण प्रदान करने की अनुमति थी, जो शहरी एवं अर्धशहरी क्षेत्रों में चिन्हित समुदायों के विकास एवं बैंकिंग सुविधाएं प्रदान करने हेतु विकसित थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। ये बैंक जहाँ किसी विशेष समुदाय या व्यवसाय से जुड़े समूहों के विकास हेतु सक्रिय हैं, वहीं विश्वस्तरीय बैंकिंग के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के अथक प्रयास भी कर रहे हैं। अब ये केवल लघु व्यवसाय क्षेत्र में बैंकिंग सुविधा प्रदान नहीं करते, अपितु विशेष तकनीकी सुविधाओं द्वारा सभी वर्ग के ग्राहको को बैंकिग सुविधाएं प्रदान कर रहे हैं। परिणामस्वरूप इनका कार्यक्षेत्र बढ़ा है, लेकिन समय के साथ इनकी संख्या में कमी परिलक्षित हुई है। पूँजी की अपर्याप्तता, शासन-संबंधी कमजोरियाँ और तकनीकी विषमता जैसी बाधाएँ इनकी स्थिरता पर प्रभाव डालती हैं, परंतु डिजिटल बैंकिंग का प्रसार, सदस्यता आधार में विविधता और नियामकीय समर्थन यूसीबी को भविष्य के लिए अधिक सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर भी प्रदान करता है। इसलिए प्रस्तुत अध्ययन पिछले एक दशक में भारत के शहरी सहकारी बैंकों की वित्तीय गति, संरचनात्मक परिवर्तनों और उभरते अवसरों का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अतः प्रस्तुत शोध पत्र में भारत के शहरी सहकारी बैंकों के वर्ष 2015 से 2025 तक के प्रदर्शन का अध्ययन करने का प्रयास किया गया है।