A Sociological Analysis of Job Satisfaction among Female Employees of State Bank of India and HDFC Bank: A Case Study of Agra District
भारतीय स्टेट बैंक एवं एचडीएफसी बैंक में कार्यरत महिला कर्मचारियों में कार्य संतुष्टि का समाजशास्त्रीय विश्लेषणः आगरा जनपद पर आधारित एक वैयक्तिक अध्ययन (https://doi.org/10.5281/zenodo.23005832)
Keywords:
कार्य-संतुष्टि, महिला कर्मचारी, बैंक, भूमिका संघर्ष, भावनात्मक श्रम, आगरा।Abstract
प्रस्तुत शोध पत्र सार्वजनिक क्षेत्र (भारतीय स्टेट बैंक) तथा निजी क्षेत्र (एचडीएफसी बैंक) में कार्यरत् महिला कर्मचारियों की कार्य-संतुष्टि के स्तर, इसके निर्धारकों एवं अंतर्निहित समाजशास्त्रीय आयामों का एक तुलनात्मक एवं गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। यह गुणात्मक अध्ययन उत्तर प्रदेश के आगरा जनपद के शहरी एवं उप-शहरी क्षेत्रों में स्थित विभिन्न शाखाओं में कार्यरत् 21 महिला कर्मचारियों के वैयक्तिक अध्ययन पर आधारित है, जिनका चयन सोद्देश्य प्रतिचयन विधि तथा गुणात्मक शोध के ‘तथ्य संतृप्ति’ सिद्धांत के आधार पर किया गया है। अध्ययन के दौरान अर्द्ध-संरचित गहन साक्षात्कारों से प्राप्त प्राथमिक तथ्यों को पाँच प्रमुख समाजशास्त्रीय आयामों (यथा-कार्य-जीवन संतुलन, भावनात्मक श्रम, पदानुक्रम एवं स्वायत्तता, असुरक्षा बोध, और अलगाव) के अंतर्गत विश्लेषित किया गया है। विश्लेषण स्पष्ट करता है कि दोनों बैंकिंग क्षेत्रों में संतुष्टि के निर्धारक भिन्न-भिन्न व्यवस्थागत कारकों से संचालित हैं। जहाँ सार्वजनिक क्षेत्र (SBI) की महिला कर्मचारियों में संतुष्टि का मुख्य आधार ‘नौकरी का स्थायित्व’, ‘पेंशन लाभ’ तथा ‘सामाजिक प्रतिष्ठा’ है। वहीं ‘अनियोजित स्थानांतरण’ और ‘दोहरे प्रशासनिक दबाव’ उनके असंतोष का कारण बनते हैं। इसके विपरीत, निजी क्षेत्र HDFC में संतुष्टि ‘उच्च वित्तीय पैकेज’ और ‘योग्यता-आधारित पदोन्नति’ से निर्धारित होती है, किंतु ‘आक्रामक बिक्री लक्ष्य’, ‘अनिश्चित कार्य घंटे’ और ‘नौकरी की असुरक्षा’ उनके मानसिक तनाव एवं ‘दूसरी पाली’ के लैंगिक संघर्ष को तीव्र करते हैं। यह अध्ययन रेखांकित करता है कि बैंकिंग क्षेत्र में महिलाओं की कार्य-संतुष्टि केवल आर्थिक प्रतिफल पर निर्भर नहीं है, बल्कि यह कार्यस्थल की स्वायत्तता, पितृसत्तात्मक पारिवारिक अपेक्षाओं और संगठनात्मक संवेदनशीलता के जटिल अंतर्संबंधों का परिणाम है।
