Study of the impact of MNREGA on the lives of Rural Laborers in Chitrakoot district
चित्रकूट जिले में ग्रामीण मजदूरों के जीवन पर मनरेगा के प्रभाव का अध्ययन (https://doi.org/10.5281/zenodo.21424970)
Keywords:
मनरेगा, बुनियादी जरूरतें, गरीबी, ग्रामीण क्षेत्र, सशक्तिकरण, समावेशी विकास।Abstract
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) ग्रामीण इलाकों में आजीविका की सुरक्षा बढ़ाने के लिए एक प्रमुख ग्रामीण रोजगार योजना है। इसका उद्देश्य अकुशल शारीरिक काम करने वालों को हर साल कम से कम 100 दिनों का गारंटीकृत वेतन वाला रोजगार देना है। यह अध्ययन उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले के चुने हुए गांवों में ग्रामीण परिवारों की आजीविका पर मनरेगा के प्रभाव का पता लगाने के लिए किया गया। ‘स्ट्रैटिफाइड रैंडम सैंपलिंग’ का प्रयोग करके कुल 60 लाभार्थियों को चुना गया और एक संरचित प्रश्नावली के जरिए आंकड़ों का संकलन किया गया। विश्लेषण से पता चला कि मनरेगा ने हर साल औसतन 65 दिनों का रोजगार दिया, जिसमें प्रति दिन औसतन 252 रुपए का वेतन मिला, जिससे सालाना आय 16380 रुपए हुई। मनरेगा से परिवार की आय में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हुई, जिससे भोजन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बेहतर हुई। इसके अलावा, महिला प्रतिभागियों ने बेहतर आर्थिक स्वतंत्रता और निर्णय लेने की क्षमता की बात कही, जो महिला सशक्तिकरण में मनरेगा की सकारात्मक भूमिका को दिखाता है। हालांकि, मुख्य चुनौतियों में वेतन भुगतान में देरी, काम की सीमित उपलब्धता और अपने अधिकारों के बारे में जानकारी की कमी शामिल थी। अध्ययन बताता है कि मनरेगा ग्रामीण आजीविका को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाता है, लेकिन इसकी पूरी क्षमता का लाभ उठाने के लिए इसे सही ढंग से लागू करना और समय पर भुगतान करना जरूरी है। इसलिए, प्रस्तुत शोध पत्र में चित्रकूट जिले में ग्रामीण मजदूरों के जीवन पर मनरेगा के प्रभाव का अध्ययन करने का प्रयास किया गया है।