An Overview of Civic Duties as the Cornerstone of a Developed India
विकसित भारत की आधारशिला के रूप में नागरिक कर्तव्यों का अवलोकन (https://doi.org/10.5281/zenodo.21787366)
Keywords:
नागरिक कर्तव्य, विकसित भारत, एकता, सामाजिक न्याय, मूल अधिकार।Abstract
किसी राष्ट्र का निर्माण केवल पत्थरों, पुलों और इमारतों से नहीं, बल्कि नागरिकों के चरित्र और आचरण से होता है। यदि भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाना है, तो ‘कर्तव्य बोध’ को शिक्षा प्रणाली और जन-जीवन का हिस्सा बनाना होगा। जब हर नागरिक अपने कर्तव्य को राष्ट्र निर्माण का योगदान समझेगा, तभी विकसित भारत का सपना साकार होगा। किसी सभ्य एवं समृद्ध राष्ट्र की पहचान उसके सशक्त नागरिकों से होती है। नागरिक सशक्तिकरण का आधार अधिकारों की जागरूकता और कर्तव्यों के प्रति निष्ठा है जो कि किसी भी देश के विकसित होने की अनिवार्य शर्त है। भारत एक ऐसी भूमि रही है जहां धर्म की व्याख्या व्यापक परिप्रेक्ष्य में की गई है। मातृ धर्म, पितृ धर्म, राष्ट्र धर्म किसी देश के नागरिक कर्तव्यों के लिए महत्वपूर्ण आदर्श है। नागरिक कर्तव्य संविधान के अनुच्छेद भाग-4क के अनुच्छेद-51ए में उल्लेखित मौलिक कर्तव्यों तक ही सीमित नहीं है, वरन हम सब भारतीयों के लिए सामाजिक एवं नैतिक दायित्व के रूप में इन्हें देखा जाना चाहिए। प्रस्तुत शोध पत्र में हम यह पड़ताल करेंगे कि सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक मोर्चे पर नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता विकसित भारत के लक्ष्य में किस तरह योगदान दे सकती है। साथ ही यह भी खोजने का प्रयास किया जाएगा की नागरिक कर्तव्यों में कौन से तत्व बाधक हैं और उन्हें दूर करके समस्त भारतीय नागरिकों में सामूहिक एकता का भाव किस तरह पैदा किया जा सकता है। इसलिए यह शोध पत्र विकसित भारत के लक्ष्य के लिए नागरिक कर्तव्य के लिए सरकार की विभिन्न योजनाओं, नागरिक संगठनों तथा विभिन्न राष्ट निर्माण संस्थाओं के प्रयासों पर केंद्रित है।
