भारत में महिला सशक्तिकरण की दशा और दिशा का अध्ययन
Keywords:
महिला, सशक्तिकरण, लैंगिक भेदभाव, शोषण, प्रभुता, परंपरा, कानून।Abstract
स्त्री और पुरूष गाड़ी के ऐसे दो पहिए हैं जिनका एक दूसरे के बिना दोनो का जीवन एकाकी है। ये दोनों ही एक दूसरे के व्यक्तित्व के निर्माण में योगदान देते है। प्राचीन ग्रंन्थो में नारी को नर से ऊॅचा स्थान उसकी सृजनकारी शक्ति के कारण दिया गया, परंतु समयान्तराल में नारी को अबला बना दिया गया और जन्म के बाद पिता पर, विवाह पश्चात पति पर और वृद्धावस्था में पुत्र पर आश्रितता के भाव ने उनकी प्रस्थिति में एक बड़ा बदलाव ला दिया। इसके पीछे कारण जो भी रहे हो। कोई भी विचार शून्य में उत्पन्न नहीं होता, बल्कि यह उस समाज की तत्कालीन परिस्थितियों की कोख से ही जन्मता है, जिसके मूल में जड़ हो चुके समाज की परंपरागत रूढ़ियों की दीवार को गिरा कर समयानुकूल परिवर्तन को अपनाना, स्वीकारना और ग्रहण करना होता है। वर्तमान भारतीय समाज में स्त्री-पुरुष भी समानता की चर्चा पुरानी मान्यताओं को पीछे छोड़कर समता और संविधान के लक्ष्यों को खोजने का ऐसा प्रयास है जो कई वर्षों से महिलाओं पर थोप दी गयी उन रूढ़िगत मान्यताओं से टकराहट है और जहां एक स्त्री को पब्लिक स्फीयर में ले जाने का सार्थक प्रयास है जिसको प्राइवेट स्फीयर में समाज की परंपरागत रूढ़ियों ने बांध कर रखा था।